आज मेरी नज़र दरवाज़े पर लगे २००९ के कैलेंडर पर पड़ी, जिस पर माननीय मंत्री महोदय अजय माकन जी कि तस्वीर बनी हुई थी, और साथ में छपा हुआ था:
"कोई रास्ता खोज लेंगे, या नया बनायेंगे" - अजय माकन
पर आजकल दिल्ली की सड़कों की हालत देखकर तो लगता है कि यह कहना ज्यादा उपयुक्त होता:
हरेक रास्ता पहले खोद देंगे, फिर नया बनायेंगे